
देश में लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाने और औद्योगिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (पीएमजीएस एनएमपी) के तहत गठित नेटवर्क योजना समूह (एनपीजी) की 108वीं बैठक में सात महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं को केवल सड़क निर्माण के नजरिए से नहीं, बल्कि एक आर्थिक इंजन के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य इन रास्तों के माध्यम से देश के आर्थिक स्तंभों जैसे कपड़ा उद्योग, कृषि-प्रसंस्करण केंद्रों और विनिर्माण हब को मुख्य बाजारों और बंदरगाहों तक सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करना है। जम्मू-कश्मीर से लेकर तमिलनाडु और लद्दाख से लेकर ओडिशा तक फैली ये परियोजनाएं न केवल परिवहन को सुगम बनाएंगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास के नए द्वार भी खोलेंगी।
यह बैठक उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) में हुई है। इसमें सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) की कुल सात परियोजनाओं की समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के तहत एकीकृत मल्टी-मॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर, अंतिम मील कनेक्टिविटी और “संपूर्ण सरकारी” दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर इन परियोजनाओं को परखा गया। साथ ही इस बात पर चर्चा की गई कि ये परियोजनाएं कैसे भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती प्रदान करेंगी और किसानों व व्यापारियों के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में मदद करेंगी। उम्मीद है कि इन पहलों से लॉजिस्टिक्स बेहतर होगा, यात्रा का समय कम होगा और लोगों को सामाजिक-आर्थिक लाभ मिलेगा। आइए इन सड़क परियोजनाओं के बारे में विस्तार से जानते हैं:
बैठक में एनएच-544 के 102.035 किलोमीटर लंबे छह लेन कॉरिडोर के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है। यह कोच्चि-कोयंबटूर-बेंगलुरु के व्यस्त आर्थिक कॉरिडोर का हिस्सा है। इसके अंतर्गत सर्विस रोड, जंक्शन, इंटरचेंज, फ्लाईओवर, आरओबी और पुलों का निर्माण एवं उन्नयन किया जाएगा। औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब, एसईजेड, रेलवे टर्मिनल और आईसीडी तक पहुंच बेहतर होगी। कपड़ा, कृषि-प्रसंस्करण व विनिर्माण (Manufacturing) सेक्टरों को लाभ मिलेगा।
189.93 किलोमीटर लंबी अमरावती आउटर रिंग रोड (ओआरआर) एक ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के रूप में प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य विजयवाड़ा, गुंटूर और तेनाली जैसे शहरी क्षेत्रों में भीड़भाड़ (यातायात) दबाव को कम करना है। यह परियोजना ओआरआर राष्ट्रीय जलमार्ग-4 से जुड़ेगी और मछलीपटनम व कृष्णापटनम बंदरगाहों तक कनेक्टिविटी बढ़ाएगी। इस परियोजना से यात्रा के समय में 30-40% तक कमी आने की संभावना है।
रफीबाद-कुपवाड़ा-चौकीबल-तंगधार तक 62.10 किलोमीटर लंबी दो लेन सड़क को पक्के शोल्डर के साथ चौड़ा और मजबूत करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह परियोजना कुपवाड़ा, चोकीबल और तंगधार जैसे सीमावर्ती इलाकों को जोड़ेगा। सुरक्षा बलों की आवाजाही के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। इससे स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और स्थानीय आजीविका को भी बढ़ावा मिलेगा।
लद्दाख में फ्यांग से 48.108 किलोमीटर लंबे लेह बाईपास-1 के निर्माण का प्रस्ताव है। यह NH-01 (श्रीनगर-लेह) को NH-03 (लेह-मनाली) से जोड़ेगा, जिससे लेह शहर के अंदर भारी ट्रैफिक का दबाव कम होगा। यह एक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर है, जो लेह शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों से यातायात को बाहर मोड़ेगा और हवाई अड्डे (Airports), औद्योगिक क्षेत्रों व दूरस्थ गांवों तक कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। इससे पर्यटन, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैले 77.102 किलोमीटर लंबे चित्रकूट-मझगवां-सतना खंड को चार लेन की विभाजित सड़क में बदला जाएगा। इससे अंतरराज्यीय संपर्क, औद्योगिक माल ढुलाई और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। सीमेंट उद्योग से जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही भी सुगम होगी, जिससे व्यापारिक लागत में कमी आएगी।
ओडिशा और झारखंड के बीच राउरकेला से सिथियो तक 156.10 किलोमीटर लंबे चार लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड राजमार्ग का प्रस्ताव। यह एनएच-53, एनएच-19, एशियाई राजमार्ग नेटवर्क और गोल्डन क्वाड्रिलैटरल से जुड़ेगा, जिससे क्षेत्रीय और अंतरराज्यीय लॉजिस्टिक्स को मजबूती मिलेगी।
पटना रिंग रोड परियोजना के अंतर्गत कन्हौली से शेरपुर तक 9.98 किलोमीटर लंबे छह लेन ग्रीनफील्ड राजमार्ग (एनएच-131जी) के निर्माण का प्रस्ताव, जो एनएच-30 और एनएच-922 को जोड़ेगा। यह पटना व आसपास के क्षेत्रों में यातायात जाम कम करने में सहायक होगा, जिससे बिहटा हवाई अड्डा, औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब तक पहुंच भी बेहतर होगी।
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